मंगल आरती और हनुमान कथा: शक्ति, भक्ति और आस्था का संगम

भारतीय संस्कृति में आरती और कथा का विशेष महत्व है। आरती केवल पूजा का हिस्सा नहीं बल्कि ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा और प्रेम की अभिव्यक्ति है। वहीं, कथा केवल घटनाओं का वर्णन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है। इसी भाव के साथ मंगल आरती और हनुमान कथा दोनों ही हमारे…

मंगल आरती और हनुमान कथा: शक्ति, भक्ति और आस्था का संगम

भारतीय संस्कृति में आरती और कथा का विशेष महत्व है। आरती केवल पूजा का हिस्सा नहीं बल्कि ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा और प्रेम की अभिव्यक्ति है। वहीं, कथा केवल घटनाओं का वर्णन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है। इसी भाव के साथ मंगल आरती और हनुमान कथा दोनों ही हमारे जीवन में भक्ति, साहस और शक्ति का संचार करते हैं।


मंगल आरती का महत्व

मंगलवार का दिन मंगल ग्रह और हनुमान जी दोनों को समर्पित है। मंगल ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में साहस, शक्ति और भूमि से जुड़ी चीज़ों का कारक माना गया है। इस दिन की मंगल आरती का विशेष महत्व है।

मंगल आरती और हनुमान कथा: शक्ति, भक्ति और आस्था का संगम

मंगल आरती करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, ऊर्जा और संकल्प शक्ति का विकास होता है। ज्योतिष मान्यता है कि जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए यह आरती विशेष फलदायी साबित होती है। यह आरती न केवल ग्रह दोष को कम करती है, बल्कि जीवन की कई परेशानियों से भी मुक्ति दिलाती है।

मंगल आरती करने के लाभ:

  1. साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
  2. नौकरी, करियर और भूमि से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है।
  3. कर्ज और आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है।
  4. शत्रु नाश होता है और जीवन में सुरक्षा बनी रहती है।
  5. मानसिक शांति और ऊर्जा की वृद्धि होती है।

मंगल आरती करने का सही समय प्रातःकाल और संध्या माना जाता है। इस दौरान स्वच्छ वस्त्र धारण करके, दीपक जलाकर और श्रद्धा से आरती करने पर इसका प्रभाव और बढ़ जाता है।


हनुमान कथा

भगवान हनुमान को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी कथा केवल पौराणिक घटनाओं का संग्रह नहीं है बल्कि जीवन के लिए गहरा संदेश भी देती है।

हनुमान जी का जन्म अंजनी माता और केसरी से हुआ था। उन्हें शिव का अंशावतार भी माना जाता है। बचपन से ही उनमें अद्भुत बल और पराक्रम था। कहा जाता है कि उन्होंने बाल्यावस्था में सूर्य को फल समझकर निगल लिया था। इसी कारण उन्हें “आदित्यपुत्र” भी कहा जाता है।

रामायण में हनुमान जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे भगवान राम के परम भक्त रहे और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहे। सीता माता की खोज, लंका दहन और राम-रावण युद्ध में उनकी वीरता अद्वितीय रही।

हनुमान कथा से मिलने वाली प्रेरणा

  1. भक्ति का महत्व – सच्ची श्रद्धा से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।
  2. साहस और धैर्य – विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और शक्ति बनाए रखना चाहिए।
  3. निःस्वार्थ सेवा – हनुमान जी का हर कार्य दूसरों के कल्याण के लिए था, न कि स्वार्थ के लिए।
  4. गुरु और भगवान के प्रति समर्पण – उनकी भक्ति यह सिखाती है कि जब मन पूरी तरह भगवान के चरणों में समर्पित हो जाए, तब चमत्कार संभव हो जाते हैं।

मंगल आरती और हनुमान कथा का आपसी संबंध

मंगल आरती और हनुमान कथा: शक्ति, भक्ति और आस्था का संगम

मंगलवार का दिन मंगल ग्रह और हनुमान जी दोनों से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि मंगल आरती करने के बाद हनुमान जी की पूजा और कथा सुनने का विशेष महत्व माना गया है। मंगल आरती हमें शक्ति और साहस देती है, जबकि हनुमान कथा हमें भक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश देती है।

मंगल कथा

इन दोनों का संगम हमारे जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाता है। जहाँ आरती हमारी आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करती है, वहीं कथा हमारे जीवन को सही दिशा प्रदान करती है।

एक समय की बात है एक ब्राह्मण दंपत्ति की कोई संतान नहीं थी, जिस कारण वह बेहद दुःखी थे। एक समय ब्राह्मण वन में हनुमान जी की पूजा के लिए गया। वहाँ उसने पूजा के साथ महावीर जी से एक पुत्र की कामना की।घर पर उसकी स्त्री भी पुत्र की प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत करती थी। वह मंगलवार के दिन व्रत के अंत में हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करती थी।

एक बार व्रत के दिन ब्राह्मणी ना भोजन बना पाई और ना ही हनुमान जी को भोग लगा सकी। उसने प्रण किया कि वह अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करेगी।

वह भूखी प्यासी छह दिन तक पड़ी रही। मंगलवार के दिन वह बेहोश हो गई। हनुमान जी उसकी निष्ठा और लगन को देखकर प्रसन्न हुए। उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप ब्राह्मणी को एक पुत्र दिया और कहा कि यह तुम्हारी बहुत सेवा करेगा।

बालक को पाकर ब्राह्मणी अति प्रसन्न हुई। उसने बालक का नाम मंगल रखा। कुछ समय उपरांत जब ब्राह्मण घर आया, तो बालक को देख पूछा कि वह कौन है?

पत्नी बोली कि मंगलवार व्रत से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उसे यह बालक दिया है। ब्राह्मण को अपनी पत्नी की बात पर विश्वास नहीं हुआ। एक दिन मौका देख ब्राह्मण ने बालक को कुएं में गिरा दिया।

घर पर लौटने पर ब्राह्मणी ने पूछा कि, मंगल कहां है? तभी पीछे से मंगल मुस्कुरा कर आ गया। उसे वापस देखकर ब्राह्मण आश्चर्यचकित रह गया। रात को हनुमानजी ने उसे सपने में दर्शन दिए और बताया कि यह पुत्र उसे उन्होंने ही दिया है।

ब्राह्मण सत्य जानकर बहुत खुश हुआ। इसके बाद ब्राह्मण दंपत्ति प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखने लगे।

जो मनुष्य मंगलवार व्रत कथा को पढ़ता या सुनता है,और नियम से व्रत रखता है उसे हनुमान जी की कृपा से सब कष्ट दूर होकर सर्व सुख प्राप्त होता है, और हनुमान जी की दया के पात्र बनते हैं।


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