Chaitra Navratri Kab Hai 2026: इस साल चैत्र नवरात्रि को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है—आखिर नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है या 20 मार्च से? जबकि पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 20 मार्च की सुबह तक मौजूद है, फिर भी नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च से क्यों माना जा रहा है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं और साथ ही जानेंगे Kalash Sthapana Muhurat 2026।
Chaitra Navratri 2026 Start Date (19 March क्यों?)
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। साल 2026 में यह तिथि:
- शुरू: 19 मार्च सुबह 6:52 बजे
- समाप्त: 20 मार्च सुबह 4:52 बजे
लेकिन यहाँ सबसे अहम नियम है—
👉 जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही पूरे दिन के लिए मान्य होती है।
19 और 20 मार्च का तिथि गणित समझें
- 19 मार्च 2026
- सूर्योदय: 06:26 AM
- उस समय: अमावस्या तिथि चल रही है
- यानी प्रतिपदा सूर्योदय के बाद शुरू होती है
- 20 मार्च 2026
- सूर्योदय: 06:25 AM
- उस समय: द्वितीया तिथि चल रही है
- क्योंकि प्रतिपदा 4:52 AM पर ही समाप्त हो चुकी है
👉 इसका मतलब है कि प्रतिपदा तिथि किसी भी दिन सूर्योदय के समय उपस्थित नहीं है, जिसे “तिथि लोप” कहा जाता है।
तो फिर 19 मार्च से ही क्यों शुरू हो रही नवरात्रि?
धार्मिक ग्रंथों जैसे देवी भागवत पुराण के अनुसार:
- अमावस्या युक्त प्रतिपदा (अमायुक्त प्रतिपदा) शुभ नहीं मानी जाती
- लेकिन इस साल प्रतिपदा का लोप (गायब होना) हो रहा है
- और द्वितीया से नवरात्रि शुरू नहीं की जा सकती
👉 इसलिए धार्मिक मान्यताओं के आधार पर 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से ही Chaitra Navratri 2026 का शुभारंभ किया जा रहा है।
Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana Muhurat
नवरात्रि का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है घटस्थापना (Kalash Sthapana)।
इस साल 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए शुभ समय:
1. प्रातःकाल मुहूर्त (सबसे उत्तम)
- सुबह का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है
2. अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर का विशेष शुभ समय
- जब सुबह का मुहूर्त छूट जाए, तब उपयोगी
👉 ध्यान रखें: कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में और शुद्ध मन से करनी चाहिए, तभी मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
Chaitra Navratri 2026 का महत्व
चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी मानी जाती है। इन 9 दिनों में:
- मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा होती है
- भक्त व्रत रखते हैं और साधना करते हैं
- अंतिम दिन महानवमी पर हवन और कन्या पूजन किया जाता है






