Shiv Chalisha: हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, और उनकी कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल व प्रभावी माध्यम है आरती। “ॐ जय शिव ओंकारा” भगवान भोलेनाथ की सबसे लोकप्रिय और सर्वमान्य आरती है, जिसे सदियों से हर घर और मंदिर में श्रद्धापूर्वक गाया जाता है। इस दिव्य आरती में न केवल शिव जी के स्वरूप का अनुपम वर्णन है, बल्कि त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की एकता का गहरा आध्यात्मिक संदेश भी छिपा है। आइए, पूरी श्रद्धा और शुद्धता के साथ पढ़ते हैं संपूर्ण शिव आरती।
ॐ जय शिव ओंकारा — शिव आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई जन गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा॥





