Holika Dahan 2026: होलिका दहन में 4 उपले क्यों रखे जाते हैं? जानें परंपरा और धार्मिक महत्व
Holika Dahan 2026 का महत्व
हर उपला पुरखों, भगवान हनुमान, शीतला माता और देवी लक्ष्मी को समर्पित होता है, जिसका मकसद परिवार की भलाई, बुरी ताकतों से सुरक्षा, सेहत और खुशहाली सुनिश्चित करना होता है।
होलिका दहन की परंपरा और उपलों का महत्व
होलिका दहन होली से पहले की एक खास रस्म है, जिसमें नेगेटिविटी को प्रतीकात्मक रूप से खत्म किया जाता है। इस साल, होलिका दहन 2 मार्च की शाम को होगा, जिसके बाद 3 मार्च को रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। इस अवसर पर पूजा के लिए गाय के गोबर के चार उपले अलग रखना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इन उपलों को ‘उपला’ या ‘बड़कुल’ कहा जाता है।
चार गाय के गोबर के उपले अलग रखने की परंपरा परिवार की खुशी और सुरक्षा से जुड़े गहरे धार्मिक कारणों से जुड़ी मानी जाती है। ये चारों उपले अलग-अलग शक्तियों और उद्देश्यों को समर्पित होते हैं।
पहला उपला: पूर्वजों के नाम
पहला उपला पुरखों के नाम पर चढ़ाया जाता है। माना जाता है कि पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने से घर में शांति और मेलजोल बना रहता है। इस परंपरा से पितृ दोष की संभावना भी कम होती है। श्रद्धा से यह उपला अर्पित करना अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का सरल तरीका माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रस्म से:
- परिवार की तरक्की में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं
- घर में मानसिक शांति बनी रहती है
- पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं
दूसरा उपला: भगवान हनुमान के लिए
दूसरा उपला भगवान हनुमान को समर्पित किया जाता है, जिन्हें संकटों को दूर करने वाला माना जाता है। होलिका दहन के दिन उनकी पूजा करने से घर पर बुरी नज़र का प्रभाव कम होता है।
मान्यता है कि हनुमान जी के नाम पर उपला चढ़ाने से:
- घर के चारों ओर सुरक्षा कवच बनता है
- नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है
- साहस और मानसिक शक्ति बढ़ती है
बुजुर्गों के अनुसार, सच्ची श्रद्धा से निभाई गई यह परंपरा भविष्य की कठिनाइयों से रक्षा करने में सहायक होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
तीसरा और चौथा उपला: शीतला माता और देवी लक्ष्मी
तीसरा उपला शीतला माता को समर्पित किया जाता है और चौथा देवी लक्ष्मी के लिए अर्पित किया जाता है।
शीतला माता को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। होली के समय मौसम बदलने के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए उनके आशीर्वाद से परिवार की अच्छी सेहत की कामना की जाती है।
वहीं देवी लक्ष्मी को समर्पित उपला घर में:
- धन
- अन्न
- समृद्धि
लाने की भावना से चढ़ाया जाता है। यह परंपरा सिखाती है कि जीवन के सभी कार्य परिवार और समाज के कल्याण के लिए होने चाहिए। देवी की कृपा प्राप्त करने हेतु इन परंपराओं का पालन जीवन की बड़ी इच्छाओं को पूरा करने वाला माना जाता है।
2026 में होलिका दहन से जुड़े विशेष पहलू
इस वर्ष होली के समय चंद्र ग्रहण की संभावित छाया की भी चर्चा है, जिसका असर सूतक काल और होलिका दहन पर पड़ सकता है। 2026 में होलिका दहन और रंगों का त्योहार दोनों ही महत्वपूर्ण रहेंगे, साथ ही भद्रा और चंद्र ग्रहण जैसे ज्योतिषीय कारकों का भी ध्यान रखा जाएगा।






