शिव आरती हिंदी में – ॐ जय शिव ओंकारा पूर्ण लिरिक्स

📖 शिव आरती (ॐ जय शिव ओंकारा) का महत्व – 300+ शब्दों में जानकारी

शिव आरती, विशेष रूप से “ॐ जय शिव ओंकारा”, भगवान शिव की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। यह आरती श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है और विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन माह और प्रदोष व्रत के दौरान भक्तों द्वारा की जाती है। शिव आरती के माध्यम से भक्त भगवान शिव की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और उनकी दिव्य शक्तियों का गुणगान करते हैं।

“ॐ जय शिव ओंकारा” आरती में भगवान शिव को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें उनके त्रिशूल, डमरू, जटाओं में विराजमान गंगा, मस्तक पर चंद्रमा और गले में सर्प धारण किए हुए स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। यह शिव आरती न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है।

शिव आरती हिंदी में पढ़ने और गाने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। मान्यता है कि नियमित रूप से शिव आरती करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं। विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर शिव आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है, जब भक्त रात्रि जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करते हैं।

यदि आप भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो प्रतिदिन सुबह या शाम “शिव आरती लिरिक्स हिंदी” के साथ आरती करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यह आरती भक्त और भगवान के बीच एक आध्यात्मिक सेतु का कार्य करती है, जो भक्ति भाव को और अधिक प्रगाढ़ बनाती है।

🕉️ शिव आरती – ॐ जय शिव ओंकारा (हिंदी लिरिक्स)

ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दशभुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन मन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहे, भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर में त्रिशूल चक्र खड्ग परशु धारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्धांगी, शिव लहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहे पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

हाथ जोड़ कर विनती करूँ शिवजी के चरणा।
भक्ति में शक्ति देना, सुन लो मेरी अरजना॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

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