Shani Chalisa in Hindi – संपूर्ण शनि चालीसा पाठ और महत्व

Shani Chalisa in Hindi का पाठ हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से Shani Chalisa in Hindi का नियमित पाठ करते हैं, उन्हें शनि दोष, साढ़े साती और ढैया से राहत मिलती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए शनिवार के दिन Shani Chalisa in Hindi पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, उन्हें Shani Chalisa in Hindi का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

Shani Chalisa in Hindi का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह भक्त को अनुशासन, धैर्य और कर्म के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है। शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर Shani Chalisa in Hindi का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। शनि देव की कृपा से रुके हुए काम बनने लगते हैं और न्यायिक मामलों में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

यदि आप जीवन में बार-बार असफलता, आर्थिक परेशानी या शत्रु बाधा का सामना कर रहे हैं, तो Shani Chalisa in Hindi का नियमित पाठ आपके लिए लाभकारी हो सकता है। यह न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाता है।

Shani Chalisa in Hindi Lyrics

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

॥ चौपाई ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

जयति जयति शनिदेव दयाला, करत सदा भक्तन प्रतिपाला।
चारि भुजा तनु श्याम विराजै, माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला, टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।
कुण्डल श्रवण चमकते नाना, कंचन मुकुट शोभित सिर ध्याना॥

हाथ गदा त्रिशूल कुठारा, पल में करें शत्रु संहारा।
पिंगल कृष्ण छाया तनु धारी, छाया सुत नाम बिहारी॥

नीलांबर धारी गज की सवारी, भैंसा वाहन रूप तुम्हारी।
तेज अपार अमोघ तुम्हारा, संकट हरन मंगल कारा॥

रवि तनय जम भ्राता तुम्हारा, यमुनाजी सुत नाम पुकारा।
महिमा अपरम्पार तुम्हारी, शनि देव भक्तन हितकारी॥

जो कोई श्रद्धा से ध्यावे, दुःख दरिद्र निकट न आवे।
करै पाठ जो चालीसा कोई, सिद्धि प्राप्ति होय सब सोई॥

दुःखी दरिद्र रोगी जो कोई, संकट मिटे नाश सब होई।
जय जय जय शनिदेव दयाला, करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

॥ दोहा ॥
जो यह पढ़े शनिचालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।
रवि पुत्र शनिदेव कृपाला, राखहु जन की सदा लाज॥

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