Temple: जबलपुर का अनोखा चौसठ योगिनी मंदिर, जहाँ शिव-पार्वती एक साथ विराजमान हैं

जबलपुर का प्राचीन चौसठ योगिनी मंदिर: जहां शिव-पार्वती की अनूठी प्रतिमा करती है भक्तों को मंत्रमुग्ध सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही पूरा देश शिव भक्ति के सागर में डूब गया है। चारों ओर ‘हर-हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारे गूंज रहे हैं। शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें…

Temple: जबलपुर का अनोखा चौसठ योगिनी मंदिर, जहाँ शिव-पार्वती एक साथ विराजमान हैं

जबलपुर का प्राचीन चौसठ योगिनी मंदिर: जहां शिव-पार्वती की अनूठी प्रतिमा करती है भक्तों को मंत्रमुग्ध

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही पूरा देश शिव भक्ति के सागर में डूब गया है। चारों ओर ‘हर-हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारे गूंज रहे हैं। शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जो भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और उनकी कृपा पाने के लिए आतुर हैं। इसी शिवमय वातावरण के बीच, मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में स्थित प्राचीन ‘चौसठ योगिनी मंदिर’ अपनी अद्भुत महिमा के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इतिहास और वास्तुकला का भी एक बेजोड़ नमूना है।

भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों में स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित भगवान शिव और माता पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा है। कहा जाता है कि ऐसी प्रतिमा पूरे देश में कहीं और देखने को नहीं मिलती, जिसमें महादेव और माता पार्वती विवाह की मुद्रा में एक ही नंदी पर विराजमान हों। यह मंदिर सदियों से अपनी अलौकिक ऊर्जा और ऐतिहासिक रहस्यों को समेटे हुए है, जो हर साल लाखों पर्यटकों और भक्तों को अपनी ओर खींचता है।

तंत्र विद्या का प्रमुख केंद्र और ऐतिहासिक महत्व

इतिहासकारों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में कलचुरी काल के दौरान कराया गया था। उस समय यह क्षेत्र ‘त्रिपुरी’ के नाम से जाना जाता था और शक्ति उपासना का सबसे बड़ा केंद्र था। मंदिर की बनावट और इसके नामकरण के पीछे का कारण यहां स्थापित 64 योगिनियों की प्रतिमाएं हैं। माना जाता है कि प्राचीन काल में यह स्थान तंत्र विद्या की शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था, जिसे ‘तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी’ भी कहा जाता था। दूर-दराज से साधक यहां आकर गोपनीय साधनाएं करते थे और तंत्र का गूढ़ ज्ञान प्राप्त करते थे।

  • वास्तुकला: मंदिर का निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से हुआ है, जो आज भी अपनी मजबूती के साथ खड़ा है।
  • योगिनी प्रतिमाएं: मूल रूप से यहां 64 योगिनियां स्थापित थीं, जिनमें से वर्तमान में 61 प्रतिमाएं सुरक्षित हैं।
  • शक्ति का वास: इन योगिनियों को मां दुर्गा के ही विभिन्न स्वरूपों के रूप में पूजा जाता है।
  • संरक्षण: वर्तमान में यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है।

शिव-पार्वती का दुर्लभ स्वरूप

मंदिर के महंत धर्मेंद्र पुरी गोस्वामी बताते हैं कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत पौराणिक गाथा है। यहां की सबसे अद्भुत धरोहर भगवान शिव और माता पार्वती की वह प्रतिमा है, जिसमें वे विवाह के उपरांत एक ही नंदी पर बैठे हुए हैं। सावन के महीने में इस प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भक्त इस दुर्लभ दर्शन को पाकर खुद को धन्य मानते हैं। मंदिर परिसर से नर्मदा नदी का जो विहंगम दृश्य दिखाई देता है, वह मन को असीम शांति प्रदान करता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती ने एक बार इस पहाड़ी पर विश्राम किया था। उस दौरान सुवर्ण ऋषि यहां कठोर तपस्या कर रहे थे। ऋषि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि वे इसी स्थान पर निवास करेंगे। ऐसी मान्यता है कि शिव जी की उपस्थिति के कारण ही मां नर्मदा ने अपनी धारा को संगमरमरी चट्टानों के बीच से मोड़ा, जिससे भेड़ाघाट का यह अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य आज दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

दर्शन करने आए भक्तों का मानना है कि इस मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा उनके जीवन के दुखों को दूर करने में सहायक है। मधु पटेल और दुर्गा ठाकुर जैसी नियमित दर्शनार्थी बताती हैं कि सावन के महीने में यहां आने से जो शांति मिलती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। भक्तों का मानना है कि जो भी सच्चे मन से यहां आकर शिव-पार्वती के चरणों में अपनी अर्जी लगाता है, महादेव उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि सावन के हर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

सावन के पूरे महीने मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। यदि आप भी जबलपुर की यात्रा पर हैं, तो भेड़ाघाट स्थित इस प्राचीन और अलौकिक चौसठ योगिनी मंदिर के दर्शन करना न भूलें। यह स्थान न केवल आपकी आस्था को नई ऊर्जा देगा, बल्कि आपको भारतीय इतिहास और संस्कृति के गौरवशाली पन्नों से भी रूबरू कराएगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित कथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है।



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