सावन की शुरुआत: बाबा महाकाल ने भक्तों को दर्शन देने के लिए रात 3 बजे ही खोली आंखें
पवित्र सावन मास का आगाज होते ही उज्जैन की नगरी पूरी तरह से शिवमय हो गई है। कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। सावन के पहले ही दिन बाबा महाकाल ने अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए सामान्य समय से एक घंटा पहले ही शयन त्यागा। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के दौरान दर्शन व्यवस्था में किए गए बदलावों के चलते, आज सुबह ठीक 3 बजे भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में कतारबद्ध नजर आए।
सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, और ऐसे में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। मंदिर समिति और पुजारियों के अनुसार, श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सभी को सुलभ दर्शन कराने के उद्देश्य से दर्शन व्यवस्था में विशेष परिवर्तन किए गए हैं। इसी कड़ी में अब भस्म आरती का समय सुबह 4 बजे के बजाय 3 बजे निर्धारित किया गया है, ताकि अधिक से अधिक भक्त बाबा की प्रथम आरती और भस्म श्रृंगार का आनंद ले सकें।
दिव्य अभिषेक और भस्म आरती का भव्य आयोजन
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित ओम शर्मा ने जानकारी दी कि आज भोर होते ही बाबा महाकाल का पारंपरिक रूप से पंचामृत अभिषेक किया गया। इस दौरान जल, दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बाबा का स्नान कराया गया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गूंज उठा। पुजारियों ने बाबा का दिव्य श्रृंगार किया, उन्हें रजत मुकुट धारण कराया और कपूर की आरती के साथ बाबा की भव्यता को निखारा गया।
भस्म आरती का क्षण महाकाल मंदिर में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान का दृश्य इतना मनमोहक था कि भक्त भावविभोर होकर अपनी सुध-बुध खो बैठे। भस्म रमाने के बाद भगवान महाकाल का रूप अत्यंत रौद्र और दिव्य दिखाई देता है, जिसे देखने के लिए भक्त पूरे साल प्रतीक्षा करते हैं। इस दौरान मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।
दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव: अब ‘चलायमान’ दर्शन का लाभ
सावन मास के पहले दिन से ही महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली सभी आरतियों में चलायमान दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि भक्तों की भीड़ अधिक होने पर भी उन्हें बाबा के दर्शन बिना किसी बाधा के मिल सकें। श्रद्धालु अब कतार में चलते हुए बाबा के दर्शन कर पाएंगे, जिससे मंदिर के गर्भगृह के आसपास भीड़ जमा नहीं होगी और दर्शन की प्रक्रिया सुगम बनी रहेगी।
- भस्म आरती का नया समय: अब प्रतिदिन सुबह 3 बजे से भस्म आरती शुरू होगी।
- चलायमान दर्शन: भस्म आरती से लेकर शयन आरती तक सभी दर्शन ‘चलते हुए’ (मूविंग) किए जाएंगे।
- श्रद्धालुओं की सुविधा: भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेड्स की विशेष व्यवस्था की गई है।
- आरतियों का क्रम: बाल भोग, भोग आरती, संध्या आरती और शयन आरती में भी यही व्यवस्था जारी रहेगी।
सावन के इस पावन अवसर पर उज्जैन प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक इंतजाम किए हैं। श्रावण के हर सोमवार को निकलने वाली बाबा महाकाल की भव्य सवारी के लिए भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सावन के पहले दिन ही जिस तरह से श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच सकती है। मंदिर समिति ने सभी भक्तों से अपील की है कि वे दर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखें और दर्शन व्यवस्था में सहयोग प्रदान करें ताकि बाबा की कृपा सभी पर बनी रहे।
आज सुबह हुई भस्म आरती ने यह सिद्ध कर दिया कि महाकाल की नगरी में भक्ति का प्रवाह अनवरत है। चाहे भोर का सन्नाटा हो या दिन का शोर, बाबा महाकाल के दरबार में हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर पहुंचता है और बाबा अपनी दिव्य दृष्टि से सभी के कष्टों को दूर करते हैं। सावन का यह महीना आने वाले दिनों में और भी कई अलौकिक दृश्यों का साक्षी बनेगा, जहां भक्त बाबा के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस करेंगे।






