Om Jagdish Hare Aarti: ॐ जय जगदीश हरे — जगदीश आरती
यदि आप अपने घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, तो नियमित रूप से जगदीश आरती (Jagdish Aarti) का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। “ॐ जय जगदीश हरे” एक ऐसी सार्वभौमिक आरती है जो हर मंदिर और घर में संध्यावंदन के समय पूरी श्रद्धा से गाई जाती है। इस लेख में हम आपके लिए शुद्ध शब्दों में संपूर्ण Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics लेकर आए हैं, ताकि आप अपनी दैनिक पूजा को और भी भक्तिमय बना सकें।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनशे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥
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