4 जनवरी 2026, रविवार को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बहुत महत्व दिया जा रहा है। आज से माघ का महीना शुरू हो रहा है, जिसे हिंदू धर्म में तप, ध्यान और दान का विशेष महीना माना जाता है। माघ महीने को देवताओं का प्रिय महीना भी कहा जाता है, जिसमें किए गए छोटे से छोटे पुण्य और कार्य कई गुणा फल देते हैं। आज, माघ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि का आरंभ होगा। आज, पुनर्वसु नक्षत्र दोपहर 03:12 बजे तक रहेगा, जिसके बाद रविवार को पुष्य नक्षत्र रहेगा, और इसी पुष्य नक्षत्र के कारण आज रवि पुष्य योग का शुभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिष में, पुष्य नक्षत्र को सबसे उत्कृष्ट और पोषक नक्षत्रों में गिना जाता है, और जब यह सूर्य के साथ मिलकर योग बनाता है, तो इसे रवि-पुष्य योग कहा जाता है। यह योग धन में वृद्धि, कार्यों में सफलता, स्थिरता और नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता के अनुसार, माघ महीने की शुरुआत में किए गए संकल्प पूरे महीने और पूरे वर्ष तक प्रभावी रहते हैं। यह समय केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन की दैनिक दिनचर्या, विचारों और कार्यों में सुधार का भी संकेत देता है। इस संदर्भ में, आज का पंचांग जानने के लिए हम छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित सौरभ त्रिपाठी से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
आज का अशुभ समय 4 जनवरी 2026
| अशुभ नाम | अशुभ समय |
| राहु काल | 04:17 बजे से 05:37 बजे तक |
| यमगंड | 12:15 बजे से 01:35 बजे तक |
| गुलिक काल | 02:56 बजे से 04:17 बजे तक |
इन समयों के दौरान कोई भी शुभ कार्य, नई शुरुआत, धन का लेन-देन या विवाद करना हानिकारक हो सकता है। यह समय कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि समय की मनोविज्ञान और ऊर्जा पर आधारित है। जो लोग इन समयों में बिना सोचे-समझे निर्णय लेते हैं, वे बार-बार बाधाओं का सामना करते हैं।
माघ महीने की शुरुआत का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
हिंदू सनातन धर्म में, माघ महीने को स्नान, दान और तप के लिए सबसे अच्छा समय माना गया है। विशेष रूप से, माघ महीने में स्नान को पापों को कम करने और पुण्य बढ़ाने का साधन माना जाता है। इस महीने में ठंडे पानी से स्नान करना न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और विचारों को भी शुद्ध करता है। यह विश्वास किया जाता है कि माघ महीने में किए गए दान अमर फल देते हैं। ज्योतिष के अनुसार, माघ का महीना सूर्य और चंद्रमा की ऊर्जा को संतुलित करता है। यह समय आलस्य, लापरवाही और नकारात्मक आदतों को छोड़ने का है। जो लोग नियमित रूप से संघर्ष कर रहे हैं, उनके आत्मविश्वास और धैर्य को माघ महीना मजबूत करता है। यदि माघ महीने की शुभ शुरुआत वात रवि-पुष्य योग के साथ होती है, तो इसे बहुत शुभ और सिद्ध योग माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों में बाधाएं कम होती हैं और स्थिरता अधिक होती है। यह योग विशेष रूप से वित्तीय मजबूती देता है और नौकरी और व्यवसाय में स्थिरता लाता है, और नए आरंभ के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। रवि-पुष्य योग में किए गए संकल्प जल्दी नहीं टूटते बल्कि समय के साथ मजबूत होते हैं। यही कारण है कि इस योग में किए गए पूजा, दान या निवेश भविष्य में लाभ देते हैं।
माघ महीने में रविवार के व्रत और सूर्य पूजा का महत्व
माघ महीने के रविवार को सूर्य पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस महीने में सहस्त्रांशु नाम से भगवान सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति रोग, दुख और मानसिक समस्याओं से मुक्त हो जाता है। इसके साथ ही व्यक्ति की आयु और तीव्रता भी बढ़ती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माघ महीने के रविवार को सूर्य देव की सही पूजा और व्रत करने से इच्छित परिणाम प्राप्त होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्य की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसीलिए सूर्य को पूजा अर्पित करने के लिए उठना विशेष महत्व दिया गया है। रविवार को सूर्य पूजा से पहले तिल से स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के जल में तिल और गंगा जल मिलाने से माघ महीने में पवित्र स्नान का समान पुण्य प्राप्त होता है। यह स्नान व्यक्ति को पापों से मुक्त करता है और मन एवं शरीर की शुद्धि करता है। सूर्य पूजा के बाद भगवान विष्णु के माधव स्वरूप की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है। शंख में दूध, पानी और गंगा जल मिलाकर भगवान विष्णु या श्री कृष्ण को स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, अक्षत, sacred thread, अबीर-गुलाल, पीले फूल, तुलसी की पत्तियां और सुगंधित इत्र अर्पित करें और मौसमी फल और मिठाई अर्पित करें। अंत में आरती करें और प्रसाद लें और दूसरों में भी वितरित करें।
आज का विशेष उपाय 4 जनवरी
पौष पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के सरल उपाय –
- सुबह स्नान के बाद, एक तांबे के बर्तन में पानी भरें और उसमें लाल फूल और अक्षत मिलाएं। इसके बाद “ॐ सूर्याय नमः” का मंत्र जपते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। यह साधना आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है।
- सुबह स्नान करते समय स्नान के पानी में तिल और गंगा जल मिलाएं।
- घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल से एक छोटा स्वस्तिक बनाएं।
- आज किसी जरूरतमंद व्यक्ति को विशेष रूप से भोजन, गुड़ या गर्म कपड़े दान करें।
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