सकट चौथ का व्रत मुख्य रूप से बच्चों की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और उनके जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है, जिन्हें बाधाओं का नाशक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ पर दीपदान विशेष रूप से फलदायी होता है। दीप को सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है, जो बच्चों के जीवन से अंधकार और परेशानियों को दूर करता है। यदि इस दिन बच्चे के नाम से दीप सही दिशा और स्थान पर जलाया जाए, तो इससे घर में सुख-शांति आती है और बच्चे को लंबी उम्र तथा करियर में अपार सफलता मिलती है। आइए जानते हैं इस विषय में ज्योतिषी राधाकांत वत्स, वृंदावन से।
बच्चे के नाम का दीप जलाना
सकट चौथ की संध्या को भगवान गणेश की पूजा करते समय सबसे पहले उनके सामने दीप जलाएं। लेकिन बच्चे के नाम से विशेष दीप जलाने के लिए उत्तर-पूर्व (नॉर्थ-ईस्ट) दिशा को सबसे अच्छा माना जाता है।
अपने घर के मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति के दाहिनी ओर एक घी का दीप जलाएं। इस दीप को जलाते समय अपने मन में अपने बच्चे का नाम लें और भगवान गणेश से उसके लंबे जीवन और बुद्धिमता की प्रार्थना करें। इसे ‘अखंड ज्योत’ की तरह रातभर जलने देना और भी शुभ माना जाता है।
दक्षिण दिशा और यमराज का दीप
सकट चौथ पर कई परिवारों में बच्चों की नजर और अनहोनी से बचाने के लिए घर की दक्षिण दिशा में दीप जलाने की परंपरा है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
घर के दक्षिण कोने में या मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर एक तिल के तेल का दीप रखें। यह बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। ध्यान रखें कि इस दीप को जलाने के बाद इसे बार-बार न देखें।
तुलसी के पास दीप दान
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को लक्ष्मी का वास्तविक रूप माना जाता है। सकट चौथ के दिन अपने बच्चे के नाम से तुलसी के पौधे के पास दीप जलाएं।
चूंकि यह तिलकुट चौथ है, यदि इस दीप में कुछ काले तिल मिलाए जाएं तो यह और भी प्रभावी हो जाता है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और उनका मन शांत रहता है।
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