शनि देव की कृपा प्राप्त करने, उनके प्रकोप (साढ़ेसाती, ढैया) को शांत करने और उनके पूर्ण आशीर्वाद के लिए नीचे दिए गए पूर्ण मंत्रों और स्तोत्र का जाप किया जाता है।
🪐 1. शनि मूल मंत्र (Shani Mool Mantra)
यह शनि देव का सबसे लोकप्रिय और सरल मूल मंत्र है, जिसका प्रतिदिन 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी होता है।
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
🪐 2. शनि प्राण प्रतिष्ठा एवं वैदिक मंत्र
यह शनि देव का वैदिक मंत्र है, जिसका प्रयोग विशेष पूजा, अनुष्ठान या हवन के समय किया जाता है।
ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु नः॥
🪐 3. शनि बीज मंत्र (Shani Beej Mantra)
शनि ग्रह की शांति और उनकी महादशा के कष्टों को दूर करने के लिए यह सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र माना जाता है।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
🪐 4. शनि गायत्री मंत्र (Shani Gayatri Mantra)
बुद्धि, विवेक और शनि देव की कृपा दृष्टि पाने के लिए इस गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महादैत्यय धीमहि। तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥
🪐 5. श्री शिनैश्चर स्तोत्र (दशरथ कृत शनि स्तोत्र)
शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए राजा दशरथ द्वारा रचित यह स्तोत्र सबसे अचूक और संपूर्ण माना जाता है। इसके नियमित पाठ से शनि की पीड़ा समाप्त हो जाती है।
कोणस्थः पिंग बभ्रुर्बष्म रौद्रोऽन्तकः यमः।
सौरिः शनैश्चरो मंदः पिप्पलाकेन संस्तुतः॥
एतानि दश नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्।
शनैश्चरकृता पीड़ा न कदाचि भविष्यति॥
✨ पूर्ण मंत्र जाप के मुख्य नियम
- दिन और समय: शनि मंत्रों का जाप विशेष रूप से शनिवार के दिन, संध्या काल या रात्रि के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है।
- संख्या: मंत्रों का जाप हमेशा रुद्राक्ष की माला या काले हकीक की माला से 108 बार (एक माला) करना चाहिए।
- सावधानी: मंत्र जाप के दौरान मन में श्रद्धा और सात्विक विचार रखने चाहिए, क्योंकि शनि देव कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं।




