क्या है पंचांग जिसे देखे बिना शुरू नहीं होता दिन? जानें इसे पढ़ने और समझने का तरीका

पंचांग हिंदू कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी होती है। इसे देखकर ही ज्यादातर लोग शुभ-अशुभ कार्यों का निर्णय लेते हैं। चाहे व्रत-त्योहार हों, विवाह-मुहूर्त हो या यात्रा का समय तय करना हो, पंचांग हमारे जीवन में सही समय का मार्गदर्शन करता है। पंचांग पढ़ने के…

बड़े-बुजुर्ग आज भी कोई काम शुरू करने से पहले पंचांग जरूर देखते हैं। हिंदू धर्म और शास्त्रों में इसका बहुत महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं कि पंचांग कैसे पढ़ा जा सकता है।

किसी शुभ कार्य को करने से पहले अक्सर पंचांग देखा जाता है। उसके बाद ही पूजा-विधि शुरू की जाती है। भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। यह केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का मार्गदर्शक भी है। चाहे व्रत-त्योहार हों, विवाह-मुहूर्त, यात्रा या फिर पूजा-पाठ, अधिकतर शुभ कार्य पंचांग देखकर ही शुरू किए जाते हैं। दरअसल, पंचांग समय की गणना और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का एक लेखा-जोखा देता है, जो हमें यह बताता है कि कौन-सा समय किस कार्य के लिए अनुकूल है।

पंचांग क्या है?

पंचांग का अर्थ है – ‘पांच अंगों वाला ग्रंथ’। यह सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित एक कैलेंडर है जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इन पांच तत्वों का विवरण होता है।

पंचांग के पांच अंग

  • तिथि: भारतीय पंचांग में कुल 16 प्रमुख तिथियां होती हैं, जिनमें पूर्णिमा और अमावस्या खास मानी जाती हैं।
  • वार: एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि को वार कहते हैं।
  • नक्षत्र: आकाश को 27 हिस्सों में बांटा गया है जिन्हें नक्षत्र कहा जाता है।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को मिलाकर योग निकाला जाता है।
  • करण: तिथि का आधा भाग जो मुहूर्त तय करने में उपयोग होता है।

पंचांग का महत्व

पंचांग को शुभ-अशुभ समय का मार्गदर्शक माना जाता है। यह हमें सही समय पर सही कार्य करने की प्रेरणा देता है। विवाह, गृह प्रवेश, पूजा, यात्रा जैसे महत्वपूर्ण काम पंचांग देखकर ही किए जाते हैं।

पंचांग कैसे पढ़ें?

पंचांग पढ़ने के लिए सबसे पहले तिथि देखें। उसके बाद वार, नक्षत्र, योग और करण पर ध्यान दें। ज्यादातर शुभ कार्य शुक्ल पक्ष में और सोमवार, बुधवार, गुरुवार को करना शुभ माना जाता है।

पंचक क्या है?

जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तो वह पांच विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है। यही समय पंचक कहलाता है। यह समय मिश्रित फलदायी होता है और कुछ काम करने की मनाही रहती है।

पंचक में किन कामों से बचें

  • मकान बनाना या छत डालना
  • बिस्तर/खाट बनवाना
  • लकड़ी, घास या ईंधन का भंडारण
  • दक्षिण दिशा की यात्रा
  • मृत्यु कर्म (जरूरत हो तो पंचक शांति पूजा करें)

FAQ – पंचांग से जुड़े सवाल

Q1. पंचांग क्या है?
पंचांग एक हिंदू कैलेंडर है जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी होती है।

Q2. पंचांग क्यों देखा जाता है?
शुभ मुहूर्त जानने और सही समय पर पूजा, विवाह या यात्रा जैसे कार्य करने के लिए।

Q3. पंचांग के पांच अंग कौन से हैं?
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

Q4. पंचांग कैसे पढ़ें?
पहले तिथि देखें, फिर वार, नक्षत्र, योग और करण पर ध्यान दें।

Q5. पंचक क्या है और इसमें क्या न करें?
कुंभ व मीन राशि में चंद्रमा के दौरान पंचक काल बनता है। इसमें मकान बनाना, दक्षिण दिशा यात्रा और लकड़ी/घास का भंडारण टालना चाहिए।

सारांश

पंचांग हिंदू कैलेंडर का अहम हिस्सा है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी होती है। सही समय और शुभ-अशुभ का पता लगाने के लिए पंचांग पढ़ना जरूरी है। पंचक काल में कुछ खास कामों से बचने की सलाह दी जाती है।


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